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CM भूपेश बघेल से गुहार लगाने रायपुर जायेंगे के एस के महानदी के 20 भूविस्थापित मजदूर परिवार, कहा अब और सब्र नही होगा नौकरी दिलाये या तो जेल में डाले

JANJGIR-CHAMPA: के एस के महानदी पावर कम्पनी के 20 भूविस्थापित कर्मचारी नौकरी से निकाले जाने के बाद किसी भी तरह के कार्यवाही ना होता देख अब बड़ा कदम उठाने के लिए ठान लिए पीड़ित परिवार के पुष्पांजलि राय ने बताया है कि कलेक्टर साहब भूविस्थापित मजदूरों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज करके उद्योगपतियों को मनमानी के लिए प्रोत्साहन दे रहे है जिसके वजह से कारखाना प्रबन्धन मनमानी में उतारू है जिस तरह से हमारे परिवार वाले आज 8 महीने से न्याय की राह ताक रहे है इससे यही तय किये है कि अब हम पुरे 20 परिवार रायपुर जायेंगे और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मिले बिना वापस नही आयेंगे या तो हमे नौकरी वापस दिलाये नही तो फिर जेल में डाल दिया जाए ताकि वहाँ कम से कम दो वक्त की रोटी पुरे परिवार को एक साथ मिलता रहे, इसी सम्बन्ध में आज 20 भूविस्थापित मजदूर परिवार सहित कारखाने के मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुँच गये ताकि कंपनी प्रबन्धन से कोई संपर्क करके कुछ बातचीत करके समस्याओं का हल निकाला जाए किंतु हठधर्मी प्लांट प्रबन्धन ने जैसे ही इनको आते देखा तो प्लांट के प्रवेश द्वार को बन्द कर दिया गया जिसके बाद महिलाए और बच्चे धुप में परेशान होते रहते, इसी बीच में धीरे धीरे भारी भर कम पुलिस फोर्स भी पहुँचने लगी, लेकिन भूविस्थापित मजदूर और उनके परिवार आज कुछ अलग ही मन बनाकर आये थे जिसके बाद पुलिस प्रशासन ने प्रबन्धन से 2 महिला प्रतिनिधियों की मीटिंग करायी जिसके बाद कम्पनी प्रबन्धन ने फिर कुछ करने का आश्वासन दिया है, इस पर बैठक में शामिल पूनम दुबे ने बताया कि हमारे घर की माली हालत बहुत ही ख़राब है पिछले 8 महीने से वेतन नही मिलने से विभिन्न प्रकार की समस्याएँ आ रही है मेरे पति के वेतन से हमारे परिवार का भरण पोषण होता था आज हमारी स्थिति ऐसी हो गयी है कि अब हमारे पास कोई विकल्प नही बचा जिला प्रशासन कम्पनी का एजेंट बना बैठा है कम्पनी के एक इशारे में पूरी प्रशासन एकपक्षीय कार्य करने के लिए तैयार रहती है और हमे धमकियाँ दिया जाता है, पीड़ित रामनाथ केवट ने बताया कि सरकार आज कोरोना संकट में गरीब किसान मजदूरों के लिए कार्य करने का दावा कर रही है पर ऐसा लगता है हमारा जिला छत्तीसगढ़ में नही है तभी जिला के कलेक्टर और श्रम पदाधिकारी कोरोना संकट में जीवन यापन भत्ता बन्द हो जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही कर रहा है, पूरा जिला प्रशासन के एस के प्रबन्धन के मामले में मौन रहकर हम गरीबो के ऊपर अन्याय कर रही है और भूपेश बघेल जी और उनके सरकार के लोग आँखे बंद करके बैठे है।
उल्लेखनीय है कि आज कोरोना महामारी में कही नौकरी मिलना मुश्किल है ऐसे में ये भूविस्थापित होकर भी नौकरी से बाहर रहते है तो रोजी रोटी के लिए संकट तो होगा आपको बता दे लगभग 500-600 भूविस्थापितो को नौकरी के बदले जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जा रहा है ऐसे में इन 20 परिवारों को भी ऐसे विपरीत समय में भत्ता देकर इनकी आर्थिक तंगी दूर करने का प्रयास किया जा सकता है पर यह भी नही हो पाना दुर्भाग्यपूर्ण है, आखिर ऐसी कितनी बड़ी गलती होगी जिसकी माफ़ी ऐसे संकटकालीन समय पर नही हो सकती कही ना कही इसके लिए स्थानीय जिला प्रशासन का रवैया भी दोषी है।

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